खरीफ की धीमी बुआई से मक्के की कीमतें बढ़ीं

कृषि समाचार
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मक्के की बढ़ती कीमतें और श्रावण माह के दौरान खपत में कमी के चलते मक्के के प्रमुख उपभोक्ता पोल्ट्री क्षेत्र को लागत के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। अक्टूबर में नई फसल आने तक मक्के की कीमतों में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है।

कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख मक्का उत्पादक क्षेत्रों में कम बारिश के कारण खरीफ बुआई की धीमी प्रगति के चलते मक्के की कीमतें बढ़ रही हैं। मक्के की बढ़ती कीमतों में पोल्ट्री क्षेत्र पर दबाव को बढ़ा दिया है।

दक्षिण भारत में मक्के के लिए एक बाजार माने जाने वाली दावणगेरे मंडी में मक्के की औसत कीमतों में 15-20% का उछाल दर्ज किया गया। फ़िलहाल दावणगेरे मंडी में मक्के का भाव लगभग 2,100 रूपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इरोड, सांगली, गुलाबबाग और छिंदवाड़ा जैसी अन्य मंडियों में मक्के का भाव क्रमशः 2,400, 2,480,2,050 और 2,150 रूपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं। गौरतलब है कि 2022-23 सीज़न के लिए मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,090 रूपये प्रति क्विंटल है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 14 जुलाई तक देश भर में लगभग 45.15 लाख हेक्टेयर में मक्के की फसल बोई गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4% से कम है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना में बुआई में कमी देखी गई है, जहां 17% से 26% तक कम बारिश हुई है।

मक्के की बढ़ती कीमतें और श्रावण माह के दौरान खपत में कमी के चलते मक्के के प्रमुख उपभोक्ता पोल्ट्री क्षेत्र को लागत के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। अक्टूबर में नई फसल आने तक मक्के की कीमतों में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है।