हल्दी की कीमतें 13 साल के उच्चतम स्तर पर

कृषि समाचार
Share with Social Media
तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बुआई धीमी गति से शुरू है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में वर्षा की कमी और अल नीनो के असर के चलते हल्दी का रकबा घटने का ख़तरा है। साथ ही बीजों की कमी के चलते इसकी कीमतें बढ़ गई हैं

फसल के तहत क्षेत्रफल में गिरावट और किसानों के लिए दोबारा रोपाई के लिए बीजों की कमी के चलते हल्दी की कीमतें लगभग 13 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। व्यापारियों को यह भी आशंका है कि हाजिर बाजार में कीमतें 2010 के उच्चतम स्तर 1,700 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती हैं।

निज़ामाबाद मंडी में हल्दी की फिंगर किस्म की औसत कीमत 9,898 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। इसी तरह, महाराष्ट्र की नांदेड़ मंडी में कीमतें 9,800 रुपये दर्ज की गई। मजबूत निर्यात मांग, घटी हुई आवक, बुआई में देरी और मौसम का बिगड़ा हुआ मिजाज हल्दी की कीमतों में उछाल के प्रमुख कारण है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में हल्दी का निर्यात 170,085 टन तक पहुंच गया है, जो साल-दर-साल 11% की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बुआई धीमी गति से शुरू है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में वर्षा की कमी और अल नीनो के असर के चलते हल्दी का रकबा घटने का ख़तरा है। साथ ही बीजों की कमी के चलते इसकी कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे किसानों की दोबारा फसल बोने की क्षमता बाधित हो रही है। इसके चलते भी हल्दी के उत्पादन में गिरावट के आसार है। मार्च में बेमौसम बारिश से हल्दी की फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है, जिससे हाल के महीनों में उच्च गुणवत्ता वाली हल्दी की मांग बढ़ी है और कीमतें और बढ़ गई हैं। कुल मिलाकर विभिन्न कारकों के चलते इस साल हल्दी की कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावनाएं है।